जब सही गलत बन जाए | Spoken Word Poetry
सैम टम्बलिन द्वारा
जब सही गलत बन जाता है, और गलत सही बन जाता है,
तो आखिर सही और गलत की सीमा कहाँ समाप्त होती है?
क्या निष्कर्ष पूर्वाग्रह से निकाले जाते हैं,
या फिर यह एक असंतुलित संघर्ष है?
जो भी अंत सामने आता है,
सही या गलत—यही जीवन की अंतर्निहित उलझन है।


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